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शनिवार, 29 सितंबर 2012

ये बेचारे- रिक्शेवाले!

ये रिक्शे वाले !
सदियों से मानव का बोझ ढ़ोते आ रहे हैं,
मजदूरी की सौदे बाजी निरन्तर करते आ रहे हैं।
मैंने रिक्शे वाले को आवाज दी-
'चलोगे  चौक तक'
'जी चलूंगा'
'पैसे बताओ कितने लोगे'
'जी दे देना'
'नहीं पूरे बताओ'
'पूरे पांच रुपये'
'अच्छा मुझे नही जाना'
'बाबू जी चार दे देना'
'दो देंगे बोलो चलोगे'
'अच्छा जी तीन दे देना'
मैंने भी दो रुपये का लाभ देखकर,
रिकशे में बैठ गया।
न जाने ऐसे कितने सौदौं के शिकार होते हैं
समय और दूरी के बीच, भूखे बच्चों के लिये
जिन्दगी अकुलाती है,
और निरन्तर मानव का बोझ
भूखे पेट, खीचते चले जाते है।
ये बेचारे रिकशे वाले!
( 17 फरवरी 1990 को लिखी गयी)

शुक्रवार, 3 सितंबर 2010

जीवन पूर्ति का मर्म



Please read complete mail.
रोजानl जो खाना खाते हो वो पसंद नहीं आता ? उकता गये? 
............ ... ........... .....थोड़ा पिज्जा कैसा रहेगा ? 
www.kute-group.blogspot.com
नहीं ??? ओके ......... पास्ता ?
नहीं ?? .. इसके बारे में क्या सोचते हैं ?
www.kute-group.blogspot.com
आज ये खाने का भी मन नहीं ? ... ओके .. क्या इस मेक्सिकन खाने को आजमायें ? 
www.kute-group.blogspot.com
दुबारा नहीं ? कोई समस्या नहीं .... हमारे पास कुछ और भी विकल्प हैं........     
ह्म्म्मम्म्म्म ... चाइनीज ????? ?? 
www.kute-group.blogspot.com
बर्गर्सस्स्स्सस्स्स्स ? ??????? 
www.kute-group.blogspot.com
ओके .. हमें भारतीय खाना देखना चाहिए ....... J   ? दक्षिण भारतीय व्यंजन ना ??? उत्तर भारतीय ? 
www.kute-group.blogspot.com
जंक फ़ूड का मन है ? 
www.kute-group.blogspot.com

हमारे  पास अनगिनत विकल्प हैं ..... ..   टिफिन  ? 
www.kute-group..blogspot.com
मांसाहार  ? 
www.kute-group.blogspot.com
ज्यादा मात्रा ? 
www.kute-group.blogspot.com
या केवल पके हुए मुर्गे के कुछ  टुकड़े ?
आप इनमें से कुछ भी ले सकते हैं ... या इन सब में से थोड़ा- थोड़ा  ले सकते हैं  ...

अब शेष  बची मेल के लिए  परेशान मत होओ....
 

मगर .. इन लोगों के पास कोई विकल्प नहीं है ...
 
www.kute-group.blogspot.comwww.kute-group.blogspot.comwww.kute-group.blogspot..com   www.kute-group..blogspot.com
इन्हें तो बस थोड़ा सा खाना चाहिए ताकि ये जिन्दा रह सकें .......... 


इनके बारे में  अगली बार तब सोचना जब आप किसी केफेटेरिया या होटल में यह कह कर खाना फैंक रहे होंगे कि यह स्वाद नहीं है !! 
www.kute-group.blogspot.com
 

इनके बारे में अगली बार सोचना जब आप यह कह रहे हों  ... यहाँ की रोटी इतनी सख्त है कि खायी ही नहीं जाती.........
www.kute-group.blogspot.com
कृपया खाने के अपव्यय को रोकिये  
अगर आगे से कभी आपके घर में पार्टी / समारोह हो और खाना बच जाये या बेकार जा रहा हो तो बिना झिझके आप  1098 (केवल भारत में )पर फ़ोन करें  - यह एक मजाक नहीं है - यह चाइल्ड हेल्पलाइन है । वे आयेंगे और भोजन एकत्रित करके ले जायेंगे।
कृप्या इस सन्देश को ज्यादा से ज्यादा प्रसारित करें इससे उन बच्चों का पेट भर सकता है 

कृप्या इस श्रृंखला को तोड़े नहीं ..... 
हम चुटकुले और स्पाम मेल अपने दोस्तों और अपने नेटवर्क में करते हैं ,क्यों नहीं इस बार इस अच्छे सन्देश को आगे से आगे मेल करें ताकि हम भारत को रहने के लिए दुनिया की सबसे अच्छी जगह बनाने में सहयोग कर सकें -   
'
मदद करने वाले हाथ प्रार्थना करने वाले होंठो से अच्छे होते हैं ' - हमें अपना मददगार हाथ देंवे ।
 
भगवान की तसवीरें फॉरवर्ड करने से किसी को गुड लक मिला या नहीं मालूम नहीं पर एक मेल अगर भूखे बच्चे तक खाना फॉरवर्ड कर सके  तो यह ज्यादा बेहतर है. कृपया क्रम जारी रखें....  


--
Thanks & Regards,
surjeet
(¨`·.·´¨)
`·.¸(¨`·.·´¨) Keep
(¨`·.·´¨)¸.·´ Smiling!!!
`·.¸.·

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नहीं ??? ओके ......... पास्ता ?
नहीं ?? .. इसके बारे में क्या सोचते हैं ?
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ह्म्म्मम्म्म्म ... चाइनीज ????? ?? 
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अगर आगे से कभी आपके घर में पार्टी / समारोह हो और खाना बच जाये या बेकार जा रहा हो तो बिना झिझके आप  1098 (केवल भारत में )पर फ़ोन करें  - यह एक मजाक नहीं है - यह चाइल्ड हेल्पलाइन है । वे आयेंगे और भोजन एकत्रित करके ले जायेंगे।
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कृप्या इस श्रृंखला को तोड़े नहीं ..... 
हम चुटकुले और स्पाम मेल अपने दोस्तों और अपने नेटवर्क में करते हैं ,क्यों नहीं इस बार इस अच्छे सन्देश को आगे से आगे मेल करें ताकि हम भारत को रहने के लिए दुनिया की सबसे अच्छी जगह बनाने में सहयोग कर सकें -   
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`·.¸.·    मुझे यह मेल से मेरे मित्र द्वारा प्रेषित किया गया  जरा सोचिये और इस दिश में भी कदम उठायें  ताकि ब्लॉगर जगत के लोग भी इन गरीब, निरीह लोगो तक अपना योग दान कर सकें . कितनी बिडम्बना है की कहीं तो आपके पास बहुत से विकल्प हैं भोजन  के लिए वहीँ दूसरी तरफ एक ऐसी दुनिया भी है जिन्हे दो जून की रोटी भी नसीब  नहीं है.वहीँ हमारी सरकार १ करोड़ टन अन्नाज गोदामों और मंडियों में सडा देती है या फिर विदेशों में पशुओं के चारे के लिए बेच देती है. पर इन निर्हों को नहीं बाँटती  है सुप्रीम कोर्ट को आदेश देना पड़ा कितु तब भी ये भूखे ही हैं . बिडम्बना की जय हो!